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रसोई चूल्हे का एक अभिनव आविष्कार

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संकल्पना


“पी.आर.एस.-v5”  चुल्हे की संकल्पना के प्रेरक नितीतत्व मुख्यत: दो हैं :-

  1. प्राकृतिक रूप में उपलब्ध पतली टहनियों के टुकड़े घरेलु रसोई का सर्वोत्तम और पर्याप्त इंधन है।

  2. यदि इन्हें आदर दे कर, ठीक तरह से उपयोग में लाया जाय तो हमें रसोई इंधन कि कभीभी कमी न होगी।

आज हमारे देश के गावों में रसोई इंधन की परिस्थिथि याने “लकड़ी की व्यर्थ बर्बादी और जलावन का सदा दुर्भिक्ष” ऐसे दुष्टचक्रकी एक दारुण कथा बन चुकी है|  
जहाँ वहाँ देखो, देहाती लोग जलावन के लिए बेतहाशा जंगल तोड कर अपने ही हाथों अपनी वनसंपदा का विध्वंस कर रहें हैं| 
वास्तव में रसोई के लिए आवश्यक इंधन कि तुलना में ३ से ५ गुना ज्यादा लकड़ी चूल्हों में जलाई जा रही है|   
इसके कारण लोग केवल अपनी वनसंपदा की ही नहीं बल्कि अपने सेहत की भी बरबादी कर रहें हैं|  

केवल  विनाश की ओर अग्रसर इस चाल को रोकना ही होगा | इस भयानक परिस्थिती को जल्द से जल्द सुधारना ही पड़ेगा|

जैवभार, और ख़ास करके जलावन की लाकडी, यह प्रकृति ने निर्माण किया हुआ ऊर्जा का महाभण्डार है और उसे बड़े आदर से उपयोग में लाना यह आज सबकी, विशेषकरके ग्रामवासियों की, बडी भरी जिम्मेदारी बनती है|   
सूखी लकड़ी में प्रकृति ने विलक्षण उर्जा ठूंस के भरी हुई होती है|  
विश्वास करना कठिन होगा, परन्तु भौतिक विज्ञान ऐसा कहता हैं कि १ किलो सूखी लकड़ी में भरी हुई ऊर्जा यदी पूर्णतः उपयोग में लाई जाय तो  १ टन वजन की वास्तु १.५ किलोमीटर उंचाई  तक उठाई   जा सकती है!! याने की, आदमियों से खचाखच भरी हुई ३ लिफ्ट्स दुनिया की सबसे ऊंची इमारत के ऊपर तक चढ़ाई जा सकें इतनी ऊर्जा होती हैं वह !!!
  

हम जानते नहीं , पर रास्ते में गिरी हुई छोटी छोटी टहनियों के मुट्ठीभर सूखे टुकड़ोंमें हमारे एक समय के घरेलु रसोई को लगने वाली ऊष्मीय ऊर्जासे कई अधिक ऊर्जा प्रच्छन्नता से भरी हुई होती है!  
हमें ज़रूरत है तो केवल ऐसे उपरकण की जो इस सुप्त ऊर्जा को धीरे-धीरे (याने की इतनी ही मात्रामें जितनी मात्रा में ससोई बर्तन उसे ग्रहण कर सके), बाहर निकालकर ऊष्मीय उर्जा में रुपांतरित करके भोजन को मंदगतिसे पकाते रहे, अधिक ऊर्जा व्यर्थ जाए बिना| 
पी.आर.एस.-v5 चूल्हा ऐसा ही एक उपकरण है !  
यह पी.आर.एस.-v5 चूल्हा, पतली टहनियों के टुकड़ों को, धुआँ निर्माण किये बिना, बिलकुल धीमी गती और स्थिरतासे जलता रख के उनमे समाहित प्रचंड ऊर्जाको धीरे धीरे बाहर निकाल कर रसोई बर्तन को प्रदान करनेवाला एक कार्यक्षम यंत्र है|
पी.आर.एस.-v5 चूल्हा लोगों को कम-से-कम जलावन इंधन का उपयोग करके रसोई पकाने की क्षमता व प्रेरणा देता है, और यह आदत भी उनमें विकसित करता है|   इसके साथ-ही-साथ यह चूल्हा लोगों के रसोईघरको धुआँरहित बनाकर उनके आरोग्य का रक्षण करता है|

पी.आर.एस.-v5 चूल्हा देश के ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी भागों में घरेलु रसोई बनाने की प्रक्रिया का पूरा नक्शा ही बदल डालनेवाली एक विलक्षण वस्तू है|  कचरे समान दिखने वाले पतली टहनियों के सर्वत्र बिखरें हुए छोटे-छोटे टुकडें, जिनकी ओर अज्ञानवश कोई जलावन मानके देखता भी नहीं, ऐसे उपेक्षित टुकड़ों को यह चूल्हा रसोई पकाने का प्रमुख व परिपूर्ण इंधन बनाकर उन्हें मान का स्थान दिलवाता है और उसके द्वारा जलावन की खोज में भटकनेवाले हमारे पीड़ित ग्रामवासियों का दैन्य सदा के लिए मिटाने का अभूतपूर्व आश्वासन देता है!   

महंगे, कारखाना-निर्मित रसोई इंधन की गुलामीसे एवं वृक्षसंहार के महा पापसे गरीब, असहाय और पीड़ित जनता को सदा के लिए मुक्त करने हेतु ही पी.आर.एस.-v5  चूल्हे का जन्म हुआ है| 

पी.आर.एस.-v5 चूल्हा आश्वासन  देता है कि अपने ही घर या गाँव मे सहज और लगभग मुफ्त में उपलब्ध प्राकृतिक जैवभार को केवल अल्पमात्रा में, निर्धूम और सुरक्षित तरीकेसे जलाकर संपूर्ण परिवार की पूरी रसोई बनाना अब संभव ही नहीं, बड़ा आसान भी है!  

टहनियों के निर्बल टुकडें ?
न, यह तो ऊर्जाका महाभांडार!